होमभारतीय संविधानअनुच्छेद 8 | Article 8 in Hindi - सरल और आसान शब्दों...

अनुच्छेद 8 | Article 8 in Hindi – सरल और आसान शब्दों में – भारतीय संविधान

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 8 किन विदेश में रहने वाले भारतीयों को नागरिकता देता है? जानें पूरी प्रक्रिया, पात्रता, आवेदन तरीका और इससे जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल हिंदी में।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 8 (Article 8 in Hindi) - भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्‌भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार
Article 8 in Hindi

विषय सूची

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 8 (Article 8 in Hindi) – भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्‌भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार

अनुच्छेद 8 उन लोगों के बारे में है जो भारत के बाहर रहते हैं, लेकिन उन्हें भारतीय नागरिकता पाने का अधिकार है।

किन लोगों पर लागू होता है?

यह नियम उस व्यक्ति पर लागू होता है जो:

  • खुद, या
  • उसके माता-पिता में से कोई एक, या
  • उसके दादा-दादी/नाना-नानी में से कोई एक

भारत में पैदा हुए थे (उस भारत की परिभाषा के अनुसार जो 1935 के ‘भारत शासन अधिनियम’ में थी)।

मुख्य शर्त क्या है?

  • ऐसा व्यक्ति आम तौर पर भारत के बाहर किसी देश में रह रहा हो

नागरिकता कैसे मिलती है?

व्यक्ति को भारत का नागरिक तब माना जाएगा, जब वह निम्नलिखित प्रक्रिया पूरी करे:

  1. व्यक्ति को उस देश में रहते हुए, जहाँ वह रह रहा है, भारत के राजदूत या कौंसल अधिकारी के पास आवेदन करना होगा।
  2. यह आवेदन एक निर्धारित फॉर्म में और तय तरीके से करना होगा।
  3. यह आवेदन संविधान लागू होने (26 जनवरी 1950) से पहले या बाद में किया जा सकता है।
  4. अगर भारत का वह राजनयिक या कौंसल अधिकारी उस व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में रजिस्टर कर लेता है, तो वह व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाएगा।

संक्षिप्त सारांश: अनुच्छेद 8 भारत से बाहर रहने वाले उन लोगों को भारतीय नागरिकता पाने का रास्ता देता है, जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं (जैसे कि उनका या उनके पूर्वजों का जन्म यहाँ हुआ हो)। इसके लिए उन्हें अपने रहने के देश में भारतीय दूतावास/वाणिज्य दूतावास में आवेदन करके खुद को रजिस्टर कराना होता है। सफल रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें भारत का नागरिक मान लिया जाता है।

अनुच्छेद 8 से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. अनुच्छेद 8 क्या है?

    यह भारतीय संविधान का एक प्रावधान है जो भारत के बाहर रहने वाले कुछ लोगों को, जिनके पूर्वज भारत से हैं, भारतीय नागरिक बनने का एक तरीका प्रदान करता है।

  2. यह नियम किसके लिए बना था?

    यह नियम मुख्य रूप से 26 जनवरी 1950 (संविधान लागू होने की तारीख) के आसपास, विभाजन के बाद या अन्य कारणों से विदेश में रह रहे उन भारतीय मूल के लोगों के लिए बनाया गया था, जो भारतीय नागरिकता चाहते थे।

  3. अनुच्छेद 8 के तहत कौन आवेदन कर सकता है?

    वह व्यक्ति जिसका या उसके माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी में से किसी का जन्म 15 अगस्त 1947 से पहले (1935 के अधिनियम में परिभाषित) भारत में हुआ था और वह अभी विदेश में रह रहा है।

  4. क्या यह प्रावधान अभी भी लागू है?

    हाँ, लेकिन इसका लाभ लेने का आवेदन करने का अवसर मुख्य रूप से संविधान लागू होने के शुरुआती वर्षों में था। यह एक ऐसा रास्ता था जो उन लोगों के लिए खोला गया था जो संविधान लागू होने के समय विदेश में थे। नए आवेदनों पर विशिष्ट परिस्थितियों में ही विचार किया जा सकता है।

  5. अगर मेरे पूर्वज पाकिस्तान या बांग्लादेश में पैदा हुए थे, तो क्या मैं पात्र हूँ?

    नहीं, पात्रता के लिए जन्म भारत (विभाजन से पहले के भारत की 1935 वाली परिभाषा के अनुसार) में होना जरूरी है। पाकिस्तान या बांग्लादेश में जन्मे पूर्वज इस श्रेणी में नहीं आते।

  6. आवेदन कहाँ और कैसे करना होता था?

    व्यक्ति को अपने विदेश में रहने की जगह पर, भारत के नजदीकी राजनयिक मिशन (दूतावास) या कौंसलेट में जाकर एक निर्धारित फॉर्म में आवेदन करना होता था।

  7. क्या अभी भी इस अनुच्छेद के तहत नागरिकता मिल सकती है?

    व्यावहारिक रूप से, यह प्रावधान अब बहुत कम उपयोग में है, क्योंकि यह उस विशेष ऐतिहासिक समय के लिए बनाया गया था। अब विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत “नागरिकता का पंजीकरण” या “ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI)” जैसे अन्य रास्ते उपलब्ध हैं।

  8. अनुच्छेद 8 और OCI में क्या अंतर है?

    अनुच्छेद 8 पूर्ण भारतीय नागरिकता देता है।
    OCI कार्ड पूर्ण नागरिकता नहीं है। यह एक जीवन भर का वीजा/निवास परमिट है जो भारत में रहने, काम करने और पढ़ने की सुविधा देता है, लेकिन मतदान या सरकारी नौकरी जैसे राजनीतिक अधिकार नहीं देता।

  9. क्या इस अनुच्छेद के तहत मिली नागरिकता छीनी जा सकती है?

    हाँ, भारत सरकार नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत कुछ खास परिस्थितियों में (जैसे धोखाधड़ी से नागरिकता लेना, देश के खिलाफ गद्दारी) किसी की भी नागरिकता रद्द कर सकती है, चाहे वह अनुच्छेद 8 से मिली हो या किसी और तरीके से।

  10. अगर मुझे लगता है कि मैं पात्र हूँ तो मुझे क्या करना चाहिए?

    सबसे पहले, अपने देश के नजदीकी भारतीय दूतावास या कौंसलेट से संपर्क करें और अपनी स्थिति बताएँ। वे आपको सही और updated जानकारी दे पाएंगे कि आपके लिए कौन-सा रास्ता (जैसे OCI, नागरिकता का पंजीकरण, आदि) सही रहेगा।

नोट: यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है। नागरिकता से जुड़े किसी भी कदम के लिए हमेशा अधिकारिक सरकारी वेबसाइट (भारत का गृह मंत्रालय) या भारतीय दूतावास से सलाह लें।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
संबंधित लेख

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

विज्ञापन

लोकप्रिय लेख

विज्ञापन
close

Ad Blocker Detected!

Refresh