भारतीय संविधान का अनुच्छेद 6 क्या है? जानिए आसान भाषा में कि विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए लोगों को नागरिकता कैसे मिली। पढ़िए जरूरी शर्तें और सरल व्याख्या।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 6 (Article 6 in Hindi) – पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार
अनुच्छेद 6 उन लोगों के बारे में बताता है जो विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे और यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें भारत का नागरिक कब माना जाएगा।
मूल सिद्धांत: अनुच्छेद 5 में जो कुछ भी कहा गया है, उसके बावजूद, अगर कोई व्यक्ति उस क्षेत्र से (जो अब पाकिस्तान है) भारत आकर बस गया है, तो संविधान लागू होने (26 जनवरी 1950) के समय उसे भारत का नागरिक माना जाएगा, बशर्ते वह नीचे लिखी शर्तों को पूरा करता हो।
नागरिक बनने के लिए जरूरी शर्तें:
- अनुच्छेद 6(क): पहली शर्त (जन्म से संबंध): यह जरूरी है कि वह व्यक्ति खुद, या उसके माता-पिता में से कोई, या उसके दादा-दादी (पिता के माता-पिता) या नाना-नानी (माता के माता-पिता) में से कोई, मूल रूप से ‘भारत’ (जैसा कि सन् 1935 के भारत सरकार अधिनियम में परिभाषित है) में जन्मा हो।
- अनुच्छेद 6(ख): दूसरी शर्त (आगमन की तारीख और निवास):
यह शर्त इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति भारत कब आया था:- अनुच्छेद 6(ख)(i) यदि व्यक्ति 19 जुलाई, 1948 से पहले आया हो: तो वह तभी नागरिक माना जाएगा, जब वह भारत आने की तारीख से लगातार (मामूली तौर पर) यहाँ रह रहा हो।
- अनुच्छेद 6(ख)(ii) यदि व्यक्ति 19 जुलाई, 1948 को या उसके बाद आया हो: तो वह तभी नागरिक माना जाएगा, जब उसने संविधान लागू होने (26 जनवरी 1950) से पहले, भारत सरकार द्वारा बनाए गए फॉर्म और तरीके से, सरकार द्वारा नियुक्त किए गए एक अधिकारी के पास आवेदन किया हो और उस अधिकारी ने उसका नाम नागरिक के रूप में रजिस्टर (दर्ज) कर दिया हो।
एक महत्वपूर्ण शर्त (परंतुक): ऊपर दी गई शर्त (ख) में आवेदन करने वाले व्यक्ति को तब तक रजिस्टर नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह अपना आवेदन देने की तारीख से ठीक पहले कम से कम छह महीने तक भारत में नहीं रहा हो।
संक्षिप्त सारांश: संविधान का अनुच्छेद 6 विभाजन के समय पाकिस्तान से आकर भारत में बसने वाले लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है। इसके लिए दो मुख्य शर्तें हैं: पहली, व्यक्ति या उसके पूर्वजों का मूल भारत में जन्म होना; और दूसरी, भारत आने की तारीख के अनुसार शर्तें पूरी करना। 19 जुलाई 1948 से पहले आने वालों के लिए लगातार निवास जरूरी था, जबकि उसके बाद आने वालों को सरकार के पास आवेदन करके रजिस्टर होना आवश्यक था, साथ ही आवेदन से पहले कम से कम छह महीने भारत में रहना अनिवार्य था।
अनुच्छेद 6 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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अनुच्छेद 6 आखिर है क्या?
यह भारतीय संविधान का एक विशेष नियम था, जिसने भारत-पाकिस्तान विभाजन (1947) के बाद, पाकिस्तान से भारत आकर बस गए लोगों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता बनाया। यह एक “कट-ऑफ डेट” (26 जनवरी 1950) तक के लिए लागू था।
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अनुच्छेद 6 किस पर लागू होता था?
सिर्फ उन लोगों पर जो उस भूभाग से भारत आए थे जो 1947 के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बना (जैसे पश्चिमी पंजाब, सिंध, पूर्वी बंगाल आदि)।
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क्या पाकिस्तान से आए हर किसी को नागरिकता मिल गई?
नहीं। नागरिकता पाने के लिए दो मुख्य शर्तें पूरी करनी जरूरी थीं:
पहली शर्त: व्यक्ति या उसके माता-पिता/दादा-दादी में से किसी एक का जन्म 1935 के भारत में हुआ हो।
दूसरी शर्त: व्यक्ति को 19 जुलाई 1948 से पहले या बाद आने के हिसाब से भारत में रहने या पंजीकरण की अलग-अलग प्रक्रिया पूरी करनी थी। -
19 जुलाई 1948 का क्या महत्व है?
यह तारीख एक डेडलाइन थी। इससे आने वालों और बाद में आने वालों के लिए नियम अलग-अलग थे:
1948 से पहले आए: बस लगातार भारत में रहना जरूरी था।
1948 या बाद आए: उन्हें सरकार के पास आवेदन करके अपना नाम भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत कराना जरूरी था। -
क्या यह अनुच्छेद आज भी इस्तेमाल हो सकता है?
नहीं। यह एक अस्थायी और संक्रमणकालीन प्रावधान था। इसका काम संविधान लागू होने के दिन (26 जनवरी 1950) तक उन शरणार्थियों की नागरिकता तय करना था। आज किसी के लिए इसके तहत आवेदन करना संभव नहीं है।
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अनुच्छेद 5, 6, 7 और 8 में क्या अंतर है?
ये सभी विभाजन के समय लोगों की नागरिकता तय करने के लिए बनाए गए थे:
अनुच्छेद 5: संविधान लागू होने के दिन भारत में रह रहे लोगों की नागरिकता को परिभाषित करता है।
अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत आए लोगों के लिए (जैसा ऊपर बताया)।
अनुच्छेद 7: भारत से पाकिस्तान गए लोगों की नागरिकता खत्म करने से संबंधित है।
अनुच्छेद 8: भारत के बाहर रह रहे भारतीय मूल के लोगों (जैसे अनिवासी भारतीय) के लिए नागरिकता के रास्ते बताता है। -
अगर कोई 1950 के बाद पाकिस्तान से आया है, तो उसे नागरिकता कैसे मिलेगी?
आज, ऐसे किसी भी व्यक्ति को नागरिकता पाने के लिए भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बने आम नियमों का पालन करना होगा। ये नियम पंजीकरण, देशीयकरण (नेचुरलाइजेशन) या फिर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 जैसे विशेष प्रावधानों (यदि वे लागू हों) के माध्यम से नागरिकता देते हैं।
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क्या यह नियम सिर्फ हिंदू, सिख या किसी खास धर्म के लोगों के लिए था?
नहीं। अनुच्छेद 6 किसी धर्म का जिक्र नहीं करता। यह सभी धर्मों के उन लोगों पर लागू था जो पाकिस्तान से आए थे और उपरोक्त शर्तें पूरी करते थे। हालाँकि, 2019 का नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए एक नया, तेज रास्ता बनाता है, जो एक अलग और वर्तमान कानून है।
